नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 475 की मौत; सुरंग में फंसे लोगों के लिए रेस्क्यू तेज, 121 विदेशी पर्यटक सुरक्षित निकाले गए

काठमांडू। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। भोटेकोशी और अन्य नदियों में अचानक आए उफान से कई बस्तियां, सड़कें और निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। हादसे में अब तक 475 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान तेज

रसुवा हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना ने अभियान तेज कर दिया है। सेना की टीमें जोखिम भरे हालात के बीच सुरंग तक पहुंचकर बचाव कार्य में जुटी हैं। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से 121 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जिनमें 85 भारतीय नागरिक शामिल हैं।

भारतीयों के लापता होने की खबर से बढ़ी चिंता

नेपाल की इस त्रासदी के बीच कई भारतीयों के लापता होने की खबर सामने आई है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोग प्रभावित क्षेत्रों में फंसे या लापता बताए जा रहे हैं। भारतीय अधिकारियों और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

सिक्किम सरकार ने भी नेपाल में फंसे या लापता राज्य के लोगों की सहायता के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की है। यह टीम केंद्र सरकार, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाएगी।

महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री काठमांडू के लिए रवाना

कैलाश मानसरोवर यात्रा के बाद तिब्बत में फंसे महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर काठमांडू की ओर रवाना किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, तीर्थयात्री शुक्रवार सुबह सागा से न्यालम चेकपोस्ट के रास्ते काठमांडू के लिए रवाना हुए। उनकी वापसी की उड़ान 29 अगस्त को प्रस्तावित है।

शवों की पहचान में जुटे प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

बाढ़ में बहने वाले लोगों के शव नदी के बहाव के साथ कई किलोमीटर दूर तक पहुंच रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट से बहकर आए शव चितवन, तनहुं, नवलपरासी, गोरखा सहित कई जिलों में मिलने की सूचना है। बड़ी संख्या में शव पहुंचने के कारण स्थानीय मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है। प्रशासन को शवों को सुरक्षित रखने और उनकी पहचान के लिए अस्थायी इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

झील टूटने से नए बाढ़ के खतरे ने बढ़ाई चिंता

नेपाल में पहले से जारी तबाही के बीच एक और खतरा सामने आया है। छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक बड़ी झील के टूटने की सूचना है। नेपाली सेना ने इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी है। इससे नदी का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है।

चीन के सिचुआन क्षेत्र में आए भूकंप के बाद भी नेपाल के कुछ इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। त्रिशूली क्षेत्र के लोगों को संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

भारत ने भी बढ़ाई निगरानी

नेपाल में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में नेपाल सीमा से लगे इलाकों तथा नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक समेत सीमा पार से आने वाली नदियों के जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत एवं बचाव अभियानों में सहयोग के लिए भारतीय वायुसेना का विमान भी लगाया गया है।

नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, खराब मौसम, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार बदल रहे नदी के जलस्तर के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सेना, पुलिस और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास जारी है।

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