- सामाजिक संगठनों ने दिवाकर डिमरी पर दर्ज POCSO मुकदमे की जांच पर उठाए सवाल.
- नाबालिग की सुरक्षा की भी मांग
देहरादून। टिहरी जिले के प्रतापनगर ब्लॉक के लंबगांव क्षेत्र में जून में हुई नाबालिग केतन लाल की मौत के मामले में सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर मामले की जांच की दिशा, दिवाकर डिमरी के खिलाफ दर्ज POCSO मुकदमे और आरोपियों के पक्ष में कथित दबाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि 7-8 जून 2026 की रात देवल गांव निवासी नाबालिग केतन लाल और उसके साथी दिवाकर डिमरी के साथ मारपीट की गई थी। आरोप है कि गंभीर रूप से घायल केतन की अगले दिन मौत हो गई। मामले में लंबगांव थाने में FIR दर्ज कर हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत चार आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि केतन के पिता की ओर से दर्ज प्राथमिकी में खोलगढ़ निवासी यशवीर पंवार पर मारपीट की सूचना स्वयं फोन करके देने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केतन और यशवीर पंवार की पुत्री के बीच दोस्ती को लेकर विवाद हुआ और इसी वजह से केतन के साथ बर्बर मारपीट की गई। उन्होंने इसे जातीय भेदभाव से जोड़ते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
दिवाकर पर दर्ज POCSO केस पर सवाल
ज्ञापनकर्ताओं ने 11 जुलाई को यशवीर पंवार की पत्नी की शिकायत पर दिवाकर डिमरी के खिलाफ दर्ज POCSO सहित अन्य धाराओं के मुकदमे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि दिवाकर डिमरी केतन हत्याकांड का प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी और स्वयं भी मारपीट में घायल हुआ था। ऐसे में उसके खिलाफ बाद में दर्ज हुए मुकदमे की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ज्ञापन में POCSO अधिनियम की धारा 5(n) के उल्लेख का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि इस धारा के तहत अपराध के लिए आरोपी और पीड़ित बच्चे के बीच कानून में निर्धारित पारिवारिक अथवा घरेलू संबंध की स्थिति महत्वपूर्ण है। ज्ञापनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिवाकर डिमरी के मामले में इस प्रावधान की प्रयोज्यता की भी स्वतंत्र कानूनी समीक्षा होनी चाहिए।
हालांकि, POCSO मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर ज्ञापनकर्ताओं के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस और संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
WhatsApp चैट की भी जांच की मांग
ज्ञापन में सामने आई कथित WhatsApp चैट का भी उल्लेख किया गया है। ज्ञापनकर्ताओं के अनुसार, चैट 7 जून की रात की बताई जा रही है और इससे केतन को खोलगढ़ बुलाए जाने की बात सामने आती है। उन्होंने चैट की प्रामाणिकता और स्रोत की तकनीकी जांच कराने तथा चैट से जुड़े सभी लोगों को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।
उन्होंने मुख्य आरोपी की पत्नी और उस बालिग युवती से भी पूछताछ की मांग की है, जिसके फोन से कथित तौर पर चैट होने की बात कही जा रही है। साथ ही पुलिस से डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
भीड़ के दबाव में जांच न करने की अपील
ज्ञापनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मामले में एक पक्ष की ओर से कथित तौर पर दबाव बनाया गया और सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक एवं धमकी भरी बातें कही गईं। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े किसी भी मामले में पुलिस को भीड़ अथवा राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने मुख्य सचिव से मांग की कि केतन लाल की मौत के मामले की जांच किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र अधिकारी की निगरानी में कराई जाए। साथ ही सभी उपलब्ध दस्तावेजों, कॉल डिटेल, मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराने तथा अदालत में मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
नाबालिग की सुरक्षा की भी मांग
ज्ञापनकर्ताओं ने केतन की मित्र बताई जा रही नाबालिग लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या मानसिक उत्पीड़न से बचाने के लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
ज्ञापन पर सीपीआई के समर भंडारी, सीपीएम के राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित, भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, प्रो. एन. राघवेंद्र, त्रिलोचन भट्ट, उत्तराखंड महिला मंच की विमला कोली, स्वतंत्र स्तंभकार आरपी विशाल, सर्वोदय कार्यकर्ता भुवन पाठक और सामाजिक कार्यकर्ता रघुनाथ आर्य सहित अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं।

