सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना पर आयुक्त दलीप सिंह कुंवर का सख्त, एसडीएम भगवानपुर पर 10 हजार का जुर्माना, डीएम हरिद्वार को दिए अपीलार्थी को 05 हजार रुपये प्रतिपूर्ति देने के निर्देश

देहरादून/हरिद्वार। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई सूचना निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध न कराने और आयोग के आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं वर्तमान उप जिलाधिकारी भगवानपुर देवेन्द्र सिंह नेगी पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया है। साथ ही लोक प्राधिकारी एवं जिलाधिकारी हरिद्वार को अपीलार्थी को 5 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग में हुई सुनवाई के दौरान अपीलार्थी ने आरोप लगाया कि आज तक उन्हें पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा। अपीलार्थी ने राजस्व विभाग हरिद्वार से 10 हजार रुपये प्रतिपूर्ति की मांग की थी। इस पर आयोग ने लोक प्राधिकारी एवं जिलाधिकारी हरिद्वार से स्पष्टीकरण मांगा कि अपीलार्थी को प्रतिपूर्ति क्यों न प्रदान की जाए।

सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि आयोग के पूर्व आदेश के अनुपालन में लोक सूचना अधिकारी एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचन्द्र शेट द्वारा 28 अप्रैल 2026 को पत्र संख्या-258 के माध्यम से अपीलार्थी को बिंदु संख्या-1 की सूचना उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि अपीलार्थी ने आयोग को बताया कि उपलब्ध कराई गई सूचना अप्रमाणित है। इस पर लोक सूचना अधिकारी के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि सूचना पर संबंधित अधिकारियों की मोहर एवं हस्ताक्षर अंकित हैं। आयोग ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर माना कि बिंदु संख्या-1 की सूचना उपलब्ध करा दी गई है।

हालांकि आयोग ने पाया कि 21 मार्च 2024 के अनुरोध पत्र के बिंदु संख्या-2 की पूर्ण सूचना लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने इस मामले में 9 जून 2025, 13 अगस्त 2025, 12 नवंबर 2025 और 11 फरवरी 2026 को लगातार सुनवाई करते हुए लोक सूचना अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी रुड़की को सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेशों का पालन नहीं किया गया।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह न केवल सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का उल्लंघन है, बल्कि आयोग के आदेशों की भी खुली अवहेलना है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी देवेन्द्र सिंह नेगी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में सूचना उपलब्ध न कराने का कोई संतोषजनक कारण नहीं दिया गया।

आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत देवेन्द्र सिंह नेगी पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया। आदेश में कहा गया कि तीन माह की अवधि पूर्ण होने पर उक्त राशि नियमों के अनुसार राजकोष में जमा कराई जाए। यदि संबंधित अधिकारी राशि जमा नहीं करते हैं तो जिलाधिकारी हरिद्वार उनके वेतन अथवा देयकों से कटौती कर तीन किश्तों में धनराशि राजकोष में जमा कराएंगे।

आयोग ने जिलाधिकारी हरिद्वार की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। आदेश में कहा गया कि आयोग द्वारा पूर्व सुनवाई में मांगा गया स्पष्टीकरण लगभग दो माह बाद भी उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे प्रतीत होता है कि जिलाधिकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति गंभीर नहीं हैं।

आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(8)(ख) के तहत लोक प्राधिकारी एवं जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया कि अपीलार्थी को 05 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। मामले की द्वितीय अपील का अंतिम निस्तारण करते हुए आयोग ने आदेश की प्रति दोनों पक्षों को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

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