मदरसा बोर्ड भंग कर ध्रुवीकरण की राजनीति से असली मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार – सूर्यकांत धस्माना

देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग करने के सरकार के फैसले पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस निर्णय को “ध्रुवीकरण की राजनीति” करार देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा कि राज्य सरकार महंगाई, रसोई गैस की किल्लत, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, अवैध खनन, कथित आबकारी और स्मार्ट सिटी घोटाले, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनता को जवाब देने में असफल रही है। उनका आरोप है कि इन अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सरकार धार्मिक आधार पर राजनीति कर रही है।

धस्माना ने बताया कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड मुस्लिम एजुकेशन मिशन का गठन किया गया था। इसके तहत मदरसा बोर्ड की स्थापना हुई, ताकि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जा सके। उन्होंने कहा कि बोर्ड के माध्यम से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम भी लागू किया गया था।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार यह फैसला वैचारिक दबाव में ले रही है और इसे अल्पसंख्यक विरोधी कदम बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस निर्णय का विरोध करती है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग करती है।
फिलहाल, राज्य सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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