एक जेल-एक उत्पाद पहल को मिली नई गति, जिला कारागार पौड़ी में डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने किया पिरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण का शुभारंभ

पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में जेलों को सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला कारागार पौड़ी में सोमवार से ‘एक जेल-एक उत्पाद’ पहल के तहत पिरूल क्राफ्ट आधारित तीन साप्ताहिक उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से जनकल्याण सेवा समिति, कोटद्वार द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को पिरूल से आकर्षक एवं उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे रिहाई के बाद वे स्वरोजगार स्थापित कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से तैयार होने वाले उत्पादों की देश-विदेश के बाजारों में लगातार मांग बढ़ रही है। पिरूल जैसे वन संसाधन को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षण को केवल कौशल विकास तक सीमित न रखते हुए इसे उद्यमिता से जोड़ने पर बल दिया, ताकि बंदियों को भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके।

जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण में वॉल हैंगिंग, बुके मेकिंग, सजावटी वस्तुएं, गृह उपयोगी सामग्री तथा अन्य नवाचार आधारित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तैयार उत्पादों की बायबैक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी तथा उससे प्राप्त आय का उपयोग बंदी कल्याण एवं उनके पुनर्वास संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे बंदियों का उत्साह भी बढ़ेगा और उन्हें अपने कौशल का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

जिलाधिकारी ने जिला उद्योग केंद्र एवं जेल प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बंदियों को कौशल विकास एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना उनके पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिला उद्योग केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण तथा जेल प्रशासन के सहयोग से बंदियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा, जिससे वे रिहाई के बाद सम्मानजनक एवं स्वावलंबी जीवन की ओर अग्रसर हो सकेंगे। उन्होंने दोनों विभागों को भविष्य में भी ऐसे नवाचार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर संचालित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्तियों में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ना भी है। जिला कारागार पौड़ी में इस प्रकार की पहल से सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनके भीतर आत्मविश्वास विकसित किया जा सकता है, जिससे वे भविष्य में अपराध से दूर रहकर सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर होंगे।

जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रथम चरण के अनुभवों के आधार पर आगे भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किए जाएंगे। उन्होंने जेल अधीक्षक कौशल कुमार को बंदियों के लिए कंप्यूटर टाइपिंग, कैंडल मेकिंग, हस्तशिल्प एवं अन्य रोजगारपरक कौशल विकास कार्यक्रम भी चरणबद्ध रूप से संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक बंदियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण का अवसर मिल सके।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बंदियों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं, सुझावों एवं प्रशिक्षण से जुड़े अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि बंदियों की रुचि और क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जनकल्याण सेवा समिति के प्रतिनिधि ने बताया कि पिरूल आधारित उत्पाद कम लागत में तैयार होते हैं तथा इनकी बाजार में अच्छी मांग है। यदि बंदियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं विपणन का उचित मंच उपलब्ध कराया जाए तो वे रिहाई के बाद स्वयं का रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकते हैं।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक कौशल कुमार, प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र उपासना सिंह, मास्टर ट्रेनर सरोज बिष्ट एवं प्रियतमा, जनकल्याण सेवा समिति के करन, सचिन नेगी, प्रभारी जेलर गौरव कुमार टम्टा, प्रधान बंदी रक्षक अखिलेश कुमार पाराशरी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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